यंग मैन क्रिस्चियन एसोसिएशन YMCA को अंग्रेजी के वर्णमाला Y से दर्शाया जाता है। ये। वाई एम सी ए की स्थापना जॉर्ज विलियम ने 6 जून 1844 में लन्दन में की थी। वाई एम सी ए का मुख्य लक्ष्य बॉडी, माइंड, एंड स्पिरिट को विकसित करने के लिए क्रिस्चियन सिंद्धान्तों को अपनाया था। आज इसका मुख्यालय जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में है।
YMCA का इतिहास
यंग मेन्स क्रिश्चियन एसोसिएशन (YMCA) की स्थापना जॉर्ज विलियम्स और 11 दोस्तों ने की थी। विलियम्स लंदन के एक ड्रेपर थे जो औद्योगिक क्रांति के कारण शहरों की ओर आकर्षित हुए युवाओं में से एक थे। वे प्रमुख शहरों में युवा पुरुषों के लिए स्वस्थ गतिविधियों की कमी के बारे में चिंतित थे। विलियम्स का विचार लंदन शहर में एक व्यवसाय में अपने साथी कर्मचारियों के बीच प्रार्थना और बाइबल-पढ़ने के लिए आयोजित बैठकों से विकसित हुआ, और 6 जून 1844 को, उन्होंने पहली बैठक की जिसके परिणामस्वरूप वाईएमसीए की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य चिलमन (ड्रेपरी), कढ़ाई और अन्य व्यवसायों में लगे युवाओं की आध्यात्मिक स्थिति में सुधार करना है। एंथोनी एशले-कूपर, शाफ़्ट्सबरी के 7वें अर्ल ने 1851 से 1885 में अपनी मृत्यु तक वाईएमसीए के पहले अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
1845 तक, वाईएमसीए ने व्याख्यानों की एक लोकप्रिय श्रृंखला शुरू की जो 1848 से एक्सेटर हॉल, लंदन में आयोजित की जाने लगी और अगले वर्ष प्रकाशित होने लगी, यह श्रृंखला 1865 तक चलती रही। वाईएमसीए औद्योगीकरण और युवाओं के काम करने के लिए शहरों में जाने से जुड़ा था। वाईएमसीए ने “सड़कों पर उपदेश देने और धार्मिक पथों के वितरण को एक सामाजिक मंत्रालय के साथ जोड़ दिया। परोपकारियों ने उन्हें स्वस्थ मनोरंजन के स्थानों के रूप में देखा जो युवाओं को शराब, जुआ और वेश्यावृत्ति के प्रलोभनों से बचाएगा और अच्छी नागरिकता को बढ़ावा देगा।”
YMCA के अधीन भारत में वाई एम सी ए कॉलेज ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन की स्थापना तमिलनाडु के मद्रास शहर में 1920 ईस्वी में की गई। इसका श्रेय अमेरिका के पेंसिल्वेनिया निवासी हैरी क्रो बक (HC Buck) को जाता है। एच सी बक इसके संस्थापक प्राचार्य थे। एच सी बक को भारतीय शारीरिक शिक्षा का पितामह कहा जाता है। डॉ ए जी नोहरान इसके पहले निदेशक थे।
यह विद्यालय 1986 में स्वयत्त विद्यालय (Autonomus College) की श्रेणी में आ गया था उस समय यह कॉलेज मद्रास विश्वविद्यालय से सम्बद्ध था। 2006 से अब इस स्वयत्त कॉलेज की सम्बद्धता तमिलनाडु शारीरिक शिक्षा एवं खेल विश्वविद्यालय से हो गई है। यहां पर DPEd, BPE, BPEd, तथा अन्य डिप्लोमा तथा सर्टिफिकेट कोर्स शारीरिक शिक्षा के अंतर्गत चलाये जा रहे हैं।
YMCA का योगदान
- यह भारत का पहला शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण महाविद्यालय था।
- यह दक्षिण पूर्वी एशिया का भी पहला शारीरिक शिक्षण महाविद्यालय था।
- इस विद्यालय का मोटो the abundant life है।
- विश्व YWCA, विश्व चर्च परिषद और विश्व छात्र ईसाई महासंघ जैसे अन्य विश्वव्यापी निकायों ने अपने संस्थापक मिशन वक्तव्यों में पेरिस बेसिस के तत्वों को प्रतिबिंबित किया है।
- 1865 में, जर्मनी में आयोजित वाईएमसीए के चौथे विश्व सम्मेलन ने संपूर्ण व्यक्ति को आत्मा, मन और शरीर में विकसित करने के महत्व की पुष्टि की।
- खेल के माध्यम से शारीरिक श्रम की अवधारणा, जो उस समय के लिए एक नई अवधारणा थी, को भी इस “मस्कुलर ईसाई धर्म” के हिस्से के रूप में मान्यता दी गई थी।
- वाईएमसीए (YMCA) ने कैंप फायर (संगठन), यूएसए की गर्ल स्काउट्स और अमेरिका के बॉय स्काउट्स जैसे कैंपिंग संगठनों के साथ सहयोग किया है। यह 1989 से 2015 तक चला.
वाई एम सी ए का उद्देश्य
- ऐसे शिक्षण कर्मियों को तैयार करना जो स्वास्थ्य, शारीरिक शिक्षा और खेल के क्षेत्रों में समुदाय की सेवा कर सकें।
- मजबूत वैज्ञानिक आधार के साथ खेल और शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट प्रशिक्षण प्रदान करना।
- युवा पुरुषों और महिलाओं को ईसाई प्रेम के उत्साह और भावना से युक्त स्वस्थ नागरिकों के रूप में तैयार करना।
- शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में वैज्ञानिक ज्ञान की सहायता, प्रचार, उन्नति और साझा करना।
- स्वस्थ जीवन शैली के लिए कौशल और ज्ञान प्राप्त करने का अवसर प्रदान करके छात्रों को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करना।
- व्यक्तिगत विकास के सामाजिक और नैतिक पहलू प्रदान करना।
एच सी बक (HC Buck)
एच सी बक (HC Buck) का जन्म २५ नवम्बर 1884 में फ्रांस के पेरिस शहर में हुआ था। एच सी बक यूनाइटेड स्टेट अमेरिका में कंसास के फेयरमाउण्ट कॉलेज में फुटबॉल कोच तथा फिजिकल एजुकेशन इंस्ट्रक्टर के रूप में दो वर्षों (1914-1915) तक कार्यरत रहे। इन्होने भारत के मद्रास में 1920 में वाई एम सी ए कॉलेज ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन की स्थापना की। एच सी बक इस कॉलेज के पहले प्राचार्य थे। एच सी बक को भारतीय शारीरिक शिक्षा का पितामह भी कहा जाता है। एच सी बक ने दक्कन जिमखाना में एक खेल समारोह के दौरान अपनी इच्छा जाहिर की थी कि भारत को 1920 एंटवर्प, बेल्जियम ओलम्पिक में प्रतिभाग करना चाहिए, इसके लिए उन्होंने बॉम्बे के गवर्नर लॉएड जॉर्ज से आग्रह किया कि भारतीय दल ब्रिटिश ओलम्पिक समिति के माध्यम से प्रतिभाग करने ओलम्पिक में जाये। 1920 में अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति ने भारत को प्रतिभाग करने की सम्बद्धता दे दी।

एच सी बक का योगदान
1924 पेरिस ओलम्पिक के के खिलाडियों को प्रशिक्षण एच सी बक द्वारा वाई एम सी ए कॉलेज ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन सहयोग से दिया गया था। सर दोराब जी टाटा ने इस दल को आर्थिक सहायता दी थी। एच सी बक टीम मैनेजर के रूप में इस दल के साथ गए थे।
1927 में भारतीय ओलम्पिक समिति का नाम बदल कर भारतीय ओलम्पिक संघ रखा गया। भारतीय ओलम्पिक संघ का गठन सर दोराब जी टाटा, एच सी बक, और डॉ ए जी नौहरान के 1927 गया। शारीरिक शिक्षा एवं खेलों को बढ़ावा देने के लिए सर दोराब जी टाटा तथा डॉ ए जी नौहरान के साथ मिलकर एच सी बक ने भारत में ओलम्पिक मूवमेंट की स्थापना की। एच सी बक की मृत्यु 24 जुलाई 1943 को हुई।